3 दिनों तक भू-चुंबकीय तूफान का पूर्वानुमान

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3 दिनों के लिए भू-चुंबकीय गतिविधि का पूर्वानुमान

विवरण

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३१ अगस्त २०२५: भविष्यवाणी के अनुसार, 31 अगस्त, 2025 को काइंडेक्स (kIndex) का स्तर 2 रहने वाला है, जिसे भू-चुम्बकीय गतिविधि का "शांत" स्तर माना जाता है। इस स्तर पर, चुम्बकीय क्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होते हैं, जिससे सामान्य धात्विक यंत्रों और संचार प्रणालियों पर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। भू-चुम्बकीय गतिविधि का यह शांत स्तर उन लोगों के लिए सकारात्मक है जो मौसम के प्रति संवेदनशील होते हैं, जैसे कि मिग्रेन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार लोग। ऐसे लोग अधिकतर मौसम की गतिविधियों के प्रति संवेदनशील होते हैं, लेकिन शांत स्तर पर, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करने की संभावना कम होती है। इस प्रकार, 31 अगस्त को ऐसा कोई भी विशेष मौसम परिवर्तन या प्राकृतिक घटना की संभावना नहीं है, जो ऐसे लोगों की सेहत को प्रभावित कर सके। इस दिन को सामान्य और आरामदायक समझा जा सकता है।

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०१ सितम्बर २०२५: सोमवार, 1 सितंबर, 2025 को भू-चुंबकीय गतिविधि स्तर (kIndex) 2 है, जिसे "शांत" स्तर माना जाता है। इस स्तर पर भू-चुंबकीय गतिविधि अपेक्षाकृत कम होती है, जिसका मतलब है कि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में कोई भी महत्वपूर्ण विक्षोभ नहीं होता है। इस स्थिति में जियोमैग्नेटिक तरंगों का प्रभाव न्यूनतम होता है, जिससे वातावरण में स्थिरता बनी रहती है। भू-चुंबकीय गतिविधि का स्वास्थ्य और मौसम-संवेदनशील लोगों पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। शांत स्तर पर सामान्यतः तनाव और चिड़चिड़ापन कम होता है। जिन लोगों को मौसम परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता होती है, उन्हें इस स्तर पर आराम और स्थिरता का अनुभव हो सकता है। जैसे-जैसे भू-चुंबकीय गतिविधि बढ़ती है, तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन इस स्तर पर ऐसी चिंताएं कम होती हैं। इसलिए, शांत भू-चुंबकीय गतिविधि का समय उन लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है जो मौसम परिवर्तन के प्रति सहजता महसूस करते हैं।

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०२ सितम्बर २०२५: जियोमैग्नेटिक गतिविधि का स्तर (kIndex) 1 होना, जिसे शांत स्तर माना जाता है, उस समय को दर्शाता है जब पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में कोई विशेष गतिविधि नहीं होती। इस स्तर पर, जियोमैग्नेटिक गतिविधि सामान्यतः न्यूनतम होती है, जिससे सूर्य की ऊर्जा का प्रभाव भी सीमित रहता है। इस शांत स्तर के दौरान मौसम-संवेदनशील लोगों पर प्रभाव सीमित हो सकता है। हालांकि, सामान्यतः ऐसे लोग मौसम परिवर्तन, उच्च आर्द्रता या तापमान में अचानक परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। चूंकि इस समय जियोमैग्नेटिक गतिविधि कम होती है, इसलिए मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर स्थिर रह सकता है, जिससे तनाव और चिंता कम हो सकती है। हालांकि, किसी भी वातावरणीय परिवर्तन का व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। इसलिए, मौसम परिवर्तन या अन्य बाहरी कारकों का ध्यान रखते हुए मौसम-संवेदनशील लोगों को अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखाना चाहिए।